Wednesday, 16 September, 2026

संपादकीय- रक्षाबंधन विशेष… राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं, रिश्तों और जिम्मेदारियों को भी बांधता है

✍️ संपादकीय, प्रधान संपादक- संजय मिश्रा…

रक्षाबंधन महज एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के रिश्ते की गहराई, विश्वास और भावनात्मक मजबूती का उत्सव है, कलाई पर बंधा राखी का छोटा-सा धागा देखने में भले ही साधारण हो, लेकिन इसके पीछे छिपा भाव बेहद विराट है- स्नेह, सम्मान, सुरक्षा, विश्वास और जीवनभर साथ निभानें का संकल्प।

समय बदला, जीवनशैली बदली और रिश्तों को निभानें के तरीके भी बदले, लेकिन रक्षाबंधन की आत्मा आज भी वही है, बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर केवल सुरक्षा की उम्मीद नहीं करती, बल्कि भाई के जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता की कामना भी करती है। वहीं भाई भी बहन के सम्मान, अधिकार और खुशियों की रक्षा का संकल्प लेता है।

✍️ अब सुरक्षा का अर्थ भी बदलना होगा…

आज के दौर में यह जरूरी है कि रक्षाबंधन का संदेश केवल भाई-बहन तक सीमित न रहे, यदि हम वास्तव में ‘रक्षा’ की भावना को समझते हैं, तो समाज की हर बेटी, हर महिला और हर कमजोर व्यक्ति के सम्मान एवं अधिकार की रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी बननी चाहिए, बहन की रक्षा सिर्फ उसकी कलाई पर राखी बांधकर नहीं, बल्कि उसके सपनों को सम्मान देकर, उसकी स्वतंत्रता को स्वीकार करके और उसके अधिकारों के साथ खड़े होकर होती है, इसी तरह बहन भी केवल भाई से सुरक्षा की अपेक्षा करनें वाली नहीं, बल्कि उसके संघर्षों में ताकत और उसके कठिन समय में सहारा बनने वाली साथी है।

✍️ राखी में छिपा है सामाजिक एकता का संदेश…

भारतीय त्योहारों की खूबसूरती यही है कि वे हमें व्यक्तिगत रिश्तों से आगे बढ़कर सामाजिक रिश्तों की याद दिलाते हैं। रक्षाबंधन हमें सिखाता है कि रिश्ते खून से ही नहीं, विश्वास और संवेदना से भी बनते हैं, आज जब समाज में बढ़ती व्यस्तता और डिजिटल जीवनशैली के कारण परिवारों के बीच संवाद कम होता जा रहा है, ऐसे समय में रक्षाबंधन हमें कुछ पल रुककर अपनें रिश्तों को महसूस करनें और उन्हें समय देने का अवसर देता है।

✍️ राखी का धागा कमजोर नहीं, बेहद मजबूत है
एक धागा कितना मजबूत हो सकता है…? इसका जवाब रक्षाबंधन देता है।

यह धागा दूरी को मिटाता है, नाराजगी को खत्म करता है, बचपन की यादों को वापस लाता है और वर्षों से दूर भाई-बहन को भावनाओं के एक ही सूत्र में बांध देता है, राखी बांधते समय बहन की आंखों में बचपन की शरारतें होती हैं, भाई के मन में पुरानी यादें होती हैं और दोनों के दिल में एक ही भावना- हमेशा साथ रहनें की।

✍️ इस रक्षाबंधन एक नया संकल्प लें…

आइए, इस रक्षाबंधन केवल मिठाई खिलानें और उपहार देनें तक सीमित न रहें।
एक-दूसरे के सपनों का सम्मान करें।
बहनों को बराबरी का अधिकार दें।
भाइयों की भावनाओं को समझें।
परिवार में संवाद बढ़ाएं।
और समाज में महिलाओं के सम्मान एवं सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
क्योंकि रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ किसी एक व्यक्ति की रक्षा करना नहीं, बल्कि रिश्तों में विश्वास और समाज में सम्मान की रक्षा करना है।

✍️ अंतिम शब्द…

राखी का धागा कलाई पर कुछ दिनों के लिए बंधता है, लेकिन उसका संदेश जीवनभर साथ चलता है, रिश्ते निभाइए, सिर्फ त्योहार मत मनाइए, बहन का सम्मान कीजिए, सिर्फ राखी मत बंधवाइए, भाई का साथ दीजिए, सिर्फ उपहार मत दीजिए, इस रक्षाबंधन आइए ऐसा समाज बनानें का संकल्प लें, जहां हर बहन सुरक्षित हो, हर भाई जिम्मेदार हो और हर रिश्ता विश्वास से मजबूत हो।

✍️ “राखी की डोर में सिर्फ प्यार नहीं,
एक-दूसरे के सम्मान और साथ निभानें का वचन भी बंधा है।”
आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।
📡 Sushiravani.in …

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