Wednesday, 16 September, 2026

“संपादकीय” छत्तीसगढ़ में कथित संरक्षण और पत्रकारिता की आड़ में अनियमितताओं के आरोपों पर निष्पक्ष जांच जरूरी

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। 05 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता, प्रभावशाली व्यक्तियों से कथित संरक्षण तथा शिकायतकर्ताओं की समस्याओं के निराकरण को लेकर सामनें आ रहे आरोपों नें निष्पक्षता, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, उपलब्ध बताई जा रही सूचनाओं एवं दस्तावेजों के आधार पर इन आरोपों की सत्यता निर्धारित करना संबंधित जांच एजेंसियों का विषय है, हालांकि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच आवश्यक प्रतीत होती है।

बताया जा रहा है कि एक तथाकथित पत्रकार संगठन से जुड़े कुछ व्यक्तियों को प्रभावशाली राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संपर्कों के कारण कथित संरक्षण प्राप्त है, आरोप यह भी हैं कि पत्रकारिता की पहचान अथवा संगठनात्मक प्रभाव की आड़ में कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से अनियमित एवं उत्पीड़नकारी गतिविधियां की जा रही हैं, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है, इसलिए किसी व्यक्ति या संगठन को जांच पूरी होनें से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

✍️ पीड़ितों की शिकायतों पर कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न…?

पूरे मामले का सबसे गंभीर पक्ष उन लोगों की शिकायतों से जुड़ा है, जो कथित रूप से आर्थिक, मानसिक अथवा अन्य प्रकार के उत्पीड़न का सामना करनें का दावा कर रहे हैं, यदि संबंधित व्यक्तियों नें पुलिस अथवा प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायतें प्रस्तुत की हैं, तो उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई- यह तथ्य सार्वजनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

किसी भी नागरिक को अपनी शिकायत के निराकरण के लिए लगातार कार्यालयों के चक्कर लगानें पड़ें और उसे समय पर उचित कानूनी सहायता अथवा कार्रवाई न मिले, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा करता है, शिकायत सही है या गलत, इसका निर्धारण निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।

✍️ निष्पक्ष जांच से ही सामनें आएगा वास्तविक तथ्य…

ऐसे मामलों में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय कानूनसम्मत जांच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, इसके लिए-

📡 संबंधित शिकायतों, दस्तावेजों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच हो…।
📡 संबंधित पुलिस अधिकारियों से शिकायतों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ली जाए…।
📡 आवश्यकता होनें पर वरिष्ठ अथवा स्वतंत्र जांच अधिकारी से जांच कराई जाए…।
📡 राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव के आरोपों की स्थिति में संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) की जांच की जाए…।
📡 शिकायतकर्ताओं और आरोपित पक्ष- दोनों का पक्ष निष्पक्ष रूप से दर्ज किया जाए…।
📡 आरोप प्रमाणित होनें पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए…।
📡 शिकायतकर्ताओं को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या प्रताड़ना से सुरक्षा प्रदान की जाए…।


✍️ पत्रकारिता की विश्वसनीयता भी दांव पर…

पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है, इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा पत्रकारिता की पहचान का कथित दुरुपयोग किए जानें का आरोप केवल संबंधित पक्षों तक सीमित विषय नहीं रहता, बल्कि इससे पूरे पत्रकारिता जगत की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है, वास्तविक पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता एवं प्रतिष्ठा की रक्षा करते हुए यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में कानून-विरुद्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होना आवश्यक है, साथ ही केवल पत्रकार होनें अथवा किसी संगठन से जुड़े होनें के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी मानना भी उचित नहीं होगा।

✍️ सरकार और प्रशासन से अपेक्षा- कानून सबके लिए समान हो…

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, ऐसे में जनता की अपेक्षा स्वाभाविक है कि शासन की “कानून सबके लिए समान” की भावना व्यवहार में भी दिखाई दे, किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहुंच, सामाजिक प्रभाव, पद अथवा संगठनात्मक पहचान उसके लिए कानून से अलग व्यवस्था का आधार नहीं बन सकती, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप तथ्यहीन अथवा निराधार पाए जाते हैं, तो आरोपित व्यक्ति अथवा संगठन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनें और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करनें का पूरा अवसर मिले।

इस पूरे प्रकरण को किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल के विरुद्ध अभियान के रूप में देखनें के बजाय पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्ष पत्रकारिता और कानून के शासन के व्यापक प्रश्न के रूप में देखा जाना चाहिए, आवश्यकता आरोपों को प्रचारित करनें की नहीं, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सत्य सामनें लानें की है, यदि आरोप सही हैं तो दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो और यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित पक्ष को भी न्यायपूर्ण तरीके से अपनी प्रतिष्ठा बहाल करनें का अवसर मिले।

लोकतंत्र में प्रभाव नहीं, तथ्य निर्णायक होनें चाहिए और कानून की कसौटी पर हर व्यक्ति समान होना चाहिए।

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