Wednesday, 16 September, 2026

बीज राखियों से सजेगा इस बार रक्षाबंधन, भाई-बहन के स्नेह के साथ मिलेगा हरियाली का संदेश

✍️ बिहान की महिलाओं नें स्थानीय बीजों से तैयार की पर्यावरण हितैषी राखियां, कलेक्टर सहित अधिकारियों को पहनाईं राखियां…

रायगढ़, छत्तीसगढ़। 26 अगस्त 2026

रक्षाबंधन पर्व को इस वर्ष जिले की ग्रामीण महिलाएं भाई-बहन के स्नेह के साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के संदेश से जोड़ रही हैं, बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं धान, मक्का, बरबट्टी, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, भिंडी, उड़द, मसूर, मूंगफली सहित विभिन्न स्थानीय बीजों से आकर्षक और पर्यावरण हितैषी राखियां तैयार कर रही हैं, इन राखियों के निर्माण से महिलाओं को घर बैठे अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल रहा है।

बीज राखी निर्माण को बढ़ावा देनें के लिए जिले के सातों विकासखण्डों में स्व-सहायता समूह की महिलाओं के बीच प्रतियोगिता आयोजित की गई, निर्णायक समिति द्वारा प्रत्येक विकासखंड से उत्कृष्ट बीज राखी तैयार करनें वाली महिलाओं का चयन किया गया, चयनित महिलाओं में घरघोड़ा से गायत्री सिदार, धरमजयगढ़ से गणपति राठिया, तमनार से मंजरी गुप्ता, रायगढ़ से मालती मलाकार, पुसौर से बबीता पटेल और खरसिया से संगीता भारद्वाज शामिल हैं, चयनित महिलाओं नें जिला कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों को अपनें हाथों से तैयार की गई बीज राखियां पहनाईं, कलेक्टर नें महिलाओं को प्रशस्ति पत्र एवं उपहार भेंटकर उनका उत्साहवर्धन किया।

✍️ स्थानीय बीज और हुनर से आजीविका का नया अवसर…

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी नें कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप जिला प्रशासन द्वारा स्व-सहायता समूह की महिलाओं को नवाचार, सशक्तिकरण और आजीविका से जोड़नें के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, बिहान से जुड़ी महिलाएं स्थानीय संसाधनों और अपनें हुनर का उपयोग कर आय के नए साधन विकसित कर रही हैं, उन्होंने कहा कि बीज राखी जैसी पहल महिलाओं की रचनात्मकता को रोजगार और अतिरिक्त आमदनी से जोड़नें के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश भी देती है।

✍️ राखी के साथ पौधे का संदेश…

स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय बीजों और अनाज से अलग-अलग डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं, इन राखियों में बरबट्टी, मक्का, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, ग्वारफली, भिंडी, उड़द, मसूर, मूंगफली और धान सहित विभिन्न बीजों का उपयोग किया जा रहा है, फेविकोल, रंग, स्टीकर और धागे की सहायता से तैयार इन राखियों की खासियत यह है कि उपयोग के बाद इन्हें मिट्टी में दबानें पर इनमें मौजूद बीज अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकते हैं, इस तरह यह राखी भाई-बहन के प्रेम के साथ प्रकृति और हरियाली का संदेश भी देती है।

✍️ कम लागत में आकर्षक राखी, बढ़ रही मांग…

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर कम लागत में आकर्षक बीज राखियां तैयार की जा रही हैं, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन राखियों को लोगों की पसंद मिल रही है, इससे महिलाओं को पारंपरिक राखियों से अलग उत्पाद तैयार कर रक्षाबंधन के अवसर पर अतिरिक्त आमदनी अर्जित करनें का अवसर मिला है।

धरमजयगढ़ की गणपति राठिया नें बताया कि बीज राखी तैयार करनें का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचाना है, खरसिया की संगीता भारद्वाज नें कहा कि प्लास्टिक से बनी राखियों से होनें वाले प्रदूषण को कम करनें के उद्देश्य से स्थानीय और घरेलू बीजों का उपयोग कर यह नवाचार किया गया है, रायगढ़ की मालती मलाकार नें बताया कि उनकी राखियों में चना, तिल, उड़द, अरहर, सरसों, पालक और लाल भाजी सहित विभिन्न बीजों का उपयोग किया गया है।

इस पहल से रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश भी दे रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *