Wednesday, 16 September, 2026
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तलाईपल्ली परियोजना में मुआवजा निर्धारण पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

घरघोड़ा/रायगढ़। एनटीपीसी तलाईपल्ली कोल माइनिंग परियोजना से प्रभावित ग्राम चोटीगुड़ा निवासी अबुजर खान नें परियोजना के अंतर्गत कुछ मकानों के सर्वेक्षण, क्षेत्रफल निर्धारण, संरचना (स्ट्रक्चर) के मूल्यांकन एवं मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रायगढ़ को विस्तृत शिकायत सौंपा है।

शिकायत में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय स्तर पर प्राप्त तथ्यों, परियोजना क्षेत्र की परिस्थितियों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रथम दृष्टया यह आशंका व्यक्त होती है कि कुछ मामलों में सर्वेक्षण, क्षेत्रफल निर्धारण, संरचना मूल्यांकन एवं मुआवजा निर्धारण से संबंधित अभिलेखों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर हो सकता है, शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में यह तथ्य प्रमाणित होते हैं, तो वास्तविक पात्रता से अधिक मुआवजा स्वीकृत अथवा वितरित होने से शासन एवं सार्वजनिक उपक्रम को वित्तीय क्षति पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ सर्वे क्रमांकों में पूर्व सर्वेक्षण की तुलना में वर्तमान सर्वेक्षण में क्षेत्रफल अधिक दर्शाया गया हो सकता है, जिसके आधार पर मुआवजा स्वीकृत या वितरित किया गया। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि जिन संरचनाओं के आधार पर क्षेत्रफल में वृद्धि दर्शाई गई, वे पूर्व सर्वेक्षण के दौरान मौजूद नहीं थीं तथा वर्तमान में भी उनके अस्तित्व के स्पष्ट भौतिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, शिकायतकर्ता का कहना है कि सर्वेक्षण एवं मुआवजा निर्धारण के दौरान की गई वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, ड्रोन सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी अभिलेखों के परीक्षण से इन तथ्यों का सत्यापन किया जा सकता है।

आवेदन में प्रत्येक संबंधित मकान के मूल, संशोधित एवं अंतिम सर्वेक्षण अभिलेखों का तुलनात्मक परीक्षण कराने, सक्षम तकनीकी अधिकारियों से संयुक्त भौतिक सत्यापन कराने तथा वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही मापन पत्रक, स्केच, नक्शा, जीपीएस डेटा, ड्रोन सर्वेक्षण, फोटोग्राफ सहित अन्य तकनीकी अभिलेखों की जांच तथा वास्तविक क्षेत्रफल एवं संरचना का अभिलेखों से मिलान कर मूल्यांकन समिति द्वारा अपनाए गए मानदंडों, गणना पद्धति और स्वीकृत मुआवजा राशि की समीक्षा करने का आग्रह किया गया है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच ऐसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अधिकारी अथवा समिति से कराई जाए, जिसका संबंधित सर्वेक्षण, मूल्यांकन या मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया से पूर्व में कोई प्रत्यक्ष संबंध न रहा हो। उन्होंने शासन के संभावित वित्तीय हितों का हवाला देते हुए 15 दिनों के भीतर वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र जांच समिति गठित कर जांच प्रारंभ करने और जांच प्रतिवेदन के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर प्रभावी कार्रवाई प्रारंभ नहीं होती है, तो शिकायतकर्ता एवं परियोजना प्रभावित ग्रामीण अपने संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन अथवा अन्य लोकतांत्रिक माध्यम अपनाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में उससे संबंधित प्रशासनिक एवं विधिक दायित्व सक्षम प्राधिकारी एवं प्रशासन का होगा।

शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक रायगढ़, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घरघोड़ा, परियोजना प्रमुख एनटीपीसी तलाईपल्ली, महाप्रबंधक/क्षेत्रीय महाप्रबंधक एनटीपीसी कोल माइनिंग मुख्यालय, आयुक्त बिलासपुर संभाग, सचिव/प्रमुख सचिव खनिज संसाधन विभाग, सचिव/प्रमुख सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू), छत्तीसगढ़ को भी आवश्यक परीक्षण एवं विधिसम्मत कार्रवाई के लिए प्रेषित की गई है।
उल्लेखनीय है कि अबुजर खान स्वयं भी एनटीपीसी तलाईपल्ली कोल माइनिंग परियोजना से प्रभावित ग्रामीण हैं। उनका कहना है कि शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों का निष्पक्ष सत्यापन कराकर मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सुनिश्चित करना है।

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